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Prathavi Putra (Paperback)

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ISBN978-93-82422-20-4
Page80
Year2013
Language.250 gram
BindingPaperback
AuthorAkhilesh Verma

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पृथ्वीपुत्र को मैंने सन 2009 में लिखना शुरू किया था। बारहवीं की परीक्षा समाप्त ही हुई थी और मैंने एक कोचिंग सेंटर में इंजीनियरिंग की तैयारी शुरू कर दी थी। वहाँ मेरी मुलाकात त्रिपाठी सर से हुई जा ेकि हमें रसायन पढ़ाते थे। उनसे मैं काफी घुल मिल गया था। एक दिन मैंने अपनी नोट बुक से एक कहानी सर को पढ़ाई। उनको पढ़कर काफी अच्छा लगा और उन्होंने मुझसे कहा कि इस कहानी को उपन्यास रूप में लिखना शुरू कर दे। मैंने उनकी बात मान तो ली पर मन में चिंता थी कि एक सोलहसाल का बालक उपन्यास लिख सकता है? मैंने अपने परिवार से इस बारे में बात की तो मेरे पिता मुकेश कुमार वर्मा और माँ पुष्पा वर्मा ने मुझे कुछ ना सोचते हुए बस स्वांतसुखाय ही लिखने की सलाहदी। मैं काॅपी पेन लेकर बैठ गया। अपनी पढ़ाई के बीच में जो फुर्सत के पल मिलते मैं इसमें लगा देता था। आखिरकार मेरा उपन्यास समाप्त हुआ। मुझे तारीख आज भी याद है। 21 मई सन 2010 को पृथ्वीपुत्र पूरी हो चुकी थी।
इसके बाद मेरा नेनोटेक्नोलोजी में दाखिला हो गया था और मैं अपने उपन्यास के बारे में लगभग भूल ही चुका था। फिर एक दिन जब मैं अपनी अलमारी में कुछ ढूंढ रहा था तो मुझे पृथ्वीपुत्र की प्रति दिखाई दी। मैंने उसे बाहर निकाला, उसकी धूलझाडी। कुछ सोचकर मैं उसे अपने लैपटाॅप पर टाइप करने लगा और उसके पूरा होते ही कई प्रकशकों के पास भेज दी। एक दिन मुझे कश्यप प्रकाशन से फोन आया। उन्हें कहानी काफी पसंद आई और वे मेरा उपन्यास प्रकाशित करने को राजी हो गए। इस तरह पृथ्वीपुत्रा मेरी लेखनी से निकलकर आपके हाथों तक पहुंची। उम्मीद करता हूँ कि पृथ्वीपुत्रा आपको पसंद आएगी।
पृथ्वीपुत्रा यात्रा श्रृंखला का प्रथम उपन्यास है। यह श्रृंखला किसी मुख्य किरदार से ज्यादा ब्रह्मांडीय यात्रा पर निर्भर करती है। इस यात्रा में ब्रह्माण्ड के बहुत से रोमांचक रहस्मयी संसारों को प्रतिचित्रित करने का प्रयास किया गया है। इस उपन्यास के जरिये आप इस यात्रा के शुरूआती दौर से गुजरेंगे। इसकेअलावा इस श्रृंखला में तीन और पुस्तकें हैं; ”नर्काधिकारी: पृथ्वीपुत्र का पुत्र;“ ”अ.म.स.;“ और ”आदि ड्रैगन की कथा“। अन्य पुस्तकें भी आपके हाथों में शीघ्र ही होंगी। तब तक आप पृथ्वीपुत्र के साथ इस यात्रा का आनंद उठाइये।

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