Reduced price! vaqt View larger

Vaqt (Paperback)

New product

सुबह के लगभग साढ़े दस बजने ही वाला था कि मैं टी.डी. कालेज के उमानाथ सिंह स्टेडियम में...

More details

In stock

By buying this product you can collect up to 9 loyalty points. Your cart will total 9 loyalty points that can be converted into a voucher of Rs. 1.80.


Rs. 95.00

-Rs. 25.00

Rs. 120.00

Add to wishlist

Secure Payment
Secure Payment

Data sheet

ISBN978-93-82422-17-4
Page144
Year2013
LanguageHindi
BindingPaperback
AuthorAshutosh

More info

सुबह के लगभग साढ़े दस बजने ही वाला था कि मैं टी.डी. कालेज के उमानाथ सिंह स्टेडियम में पहुँचा। मैंने देखा कि मेरे चारों दोस्त स्टेडियम की किसी एक सीढ़ी पर बैठकर गप्पें लड़ा रहे थे मेरे शरीर पर एक फटा शर्ट और पैंट था। जब उन चारों ने मुझे देखा तो और तेज हँस रहे थे बल्कि मेरे वक्त पर हँस रहे थे। एक वक्त ऐसा था जब मेरे पास करोड़ों की प्रोपर्टी हुआ करती थी और आज ऐसा वक्त है कि मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं हैं उनकी हँसी मेरे लिए नागवार गुजर रही थी। उन्हें यह मालूम नहीं था कि फटे शर्ट-पैंट में खड़ा आशू उन चारो के लिए एक बुरा वक्त लेकर आया है।
मैंने अपनी जेब से एक विदेशी पिस्तौल निकाली और उन चारों को गोली मार दी। गोलियों को तड़तड़ाहट से पूरे माहौल में अफरा-तफरी मच गयी। पुलिस की गाडि़याँ शायरन बजाती हुई उमानाथ सिंह स्टेडियम आ पहुँची। बाद में इसका अन्जाम जो भी होता मुझे उसकी कोई परवाह नहीं थी। बल्किउन चारों को मारकर मुझे जो गौरव प्राप्त हुआ, उससे मैं काफी खुश था।
तभी आवाज आती है, ”आशू!“ तम्हें पुलिस ने चारों ओर से घेर लिया है। अपनी पिस्तौल को जमीन पर रख दो नहीं तो पुलिस की गोलियों से छलनी कर दिये जाओगे। मैं तो खुद मर चुका था, एक मुर्दे को मारकर वे कौन सा मेडल हासिल कर लेते। मुझे उनकी इस शिनाख्त पर थोड़ी-सी हँसी आयी और मैंने रिवाल्वर को जमीन पर रख दिया और खुद, उनके सामने दोनों हाथों को फैला दिया ताकि वे मुझे हथकड़ी पहना सकें।

Reviews

Write a review

Vaqt (Paperback)

Vaqt (Paperback)

सुबह के लगभग साढ़े दस बजने ही वाला था कि मैं टी.डी. कालेज के उमानाथ सिंह स्टेडियम में...

10 other products in the same category: