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Darbhanga Gharana Evam Bandishen

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संगीत एक ऐसी प्रभावशाली एवं उच्च कोटि की कला है जो कि ऋषि-मुनियों एवं देवताओं तथा स्वयं भगवान को भी प्रिय रही है। सामवेद से हमे ज्ञात होता है कि यह उच्च कोटि की कला मानी जाती है।

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ISBN978-93-82422-45-7
Page248
Year2016
LanguageHindi
BindingHardcover
AuthorDr. Pt. Prem Kumar Mallik

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संगीत एक ऐसी प्रभावशाली एवं उच्च कोटि की कला है जो कि ऋषि-मुनियों एवं देवताओं तथा स्वयं भगवान को भी प्रिय रही है। सामवेद से हमे ज्ञात होता है कि यह उच्च कोटि की कला मानी जाती है।
संगीत के क्षेत्रा में घराना प्रणाली का पर्याप्त महत्व माना गया है। घरानों से तात्पर्य किसी ऐसी विशिष्ट गुरू शिष्य परंपरा से है, जिसकी अपनी खास एवं सुव्यस्थित कलात्मक शैली हो।
गायन, वादन तथा नृत्य तीनों प्रमुख विधाओं के घराने कायम हुए। गायन के अंतर्गत ध्रुवपद, ख्याल एवं ठुमरी के घराने स्थापित हुए। घराना गुरू तथा शिष्य के संयोग से ही बनता है। इस प्रकार श्रेष्ठ गुरु एवं प्रतिभाशाली शिष्य के सानिध्य से घराने का सुव्यवस्थित अस्तित्व प्रकाश में आया। इस घराना प्रणाली ने भारतीय संगीत को अत्यधिक समृद्ध किया। कहा गया है किसी भी विषय के सही ज्ञान के लिए, योग्य गुरु का होना नितान्त आवश्यक है। मुझे इस कार्य को करने की प्रेरणा मेरे गुरु एवं पिता ध्रुपद सम्राट स्व. पं. विदुर मल्लिक जी से मिली जो कि एक महान संगीतज्ञ थे। दरभंगा घराने की पहचान बनाने में और देश तथा विदेशों में दरभंगा घराने की गायकी को विकसित करने में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा। मैंने अपने पूज्य पिताजी की प्रेरणा से प्रेरित होकर ही इस कार्य को करने का प्रयास किया है, उनकी हार्दिक इच्छा यही थी कि ‘दरभंगा घराने की संगीत परम्परा पर एक पुस्तक का निर्माण करना जिससे यह पुस्तक आने वाली भावी पीढ़ी के लिए एक स्मरणीय चिन्ह बनकर अमूल्य धरोहर के रूप में रह सके।’
दरभंगा घराना हमारे भारतीय शास्त्राीय संगीत की एक प्राचीन ध्रुपद संगीत परंपरा है। लगभग 450 वर्षों से भी अधिक प्राचीन एवं 13 पीढ़ी से संगीत विरासत की धरोहर को सफलतापूर्वक निर्वाह कर रही है। ध्रुपद संगीत का एक प्राचीन घराना जिसमें खंडारवाणी एवं गोबरहारवाणी की गायन शैली सुनने को मिलती है। इस घराने की ख़ासियत है चार पट गायन शैली जिसमें ध्रुपद के अतिरिक्त ख्याल, ठुमरी-दादरा, लोक संगीत तथा विद्यापति द्वारा लिखित पद को ठुमरी एवं भजन अंग में प्रस्तुति करना।
इस पुस्तक के माध्यम से मैंने कोशिश की है कि संगीत रसिकों एवं विद्यार्थियों को इस प्राचीन पंरपरा की उत्पत्ति, इतिहास एवं उपयोगिताओं के विषय में पूर्ण रूप से जानकारी प्राप्त हो। पाठको को दरभंगा घराने की पौराणिक, अद्भुत एवं अतुलनीय संगीत परंपरा का बोध हो। इस घराने के संगीत मनीषियों को जानने एवं उनके अलौकिक एवं अविस्मरणीय योगदान एवं तपस्या को भी जानने का अवसर प्राप्त हो।
इस पुस्तक में ध्रुपद की कुछ प्राचीन एवं नवीन रचनाओं को भी स्वरबद्ध कर अंकित किया गया है, ताकि संगीत विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके। संगीत शोध एवं अध्ययन के लिए भी यह पुस्तक लाभकारी सिद्ध हो यह मेरी कामना है।

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संगीत एक ऐसी प्रभावशाली एवं उच्च कोटि की कला है जो कि ऋषि-मुनियों एवं देवताओं तथा स्वयं भगवान को भी प्रिय रही है। सामवेद से हमे ज्ञात होता है कि यह उच्च कोटि की कला मानी जाती है।